बिहार जमाबंदी आधार सीडिंग (Aadhaar Seeding) गाइड

बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जमीन की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए आधार सीडिंग (Aadhaar Seeding) को अनिवार्य कर दिया गया है। अपनी जमाबंदी को आधार कार्ड और चालू मोबाइल नंबर से लिंक करने के बाद आपकी जमीन पूरी तरह से डिजिटल लॉक हो जाती है, जिससे कोई भी फर्जी इंसान आपकी जमीन की हेराफेरी या गलत रजिस्ट्री नहीं कर पाएगा। नीचे इसकी आसान ऑनलाइन प्रक्रिया बताई गई है।

ऑनलाइन आधार सीडिंग करने की फुल डिटेल्स
आवश्यक दस्तावेज: सीडिंग शुरू करने से पहले जमीन मालिक का आधार कार्ड और आधार में लिंक मोबाइल नंबर अपने पास रखें, क्योंकि वेरिफिकेशन के लिए एक सुरक्षा ओटीपी (OTP) भेजा जाएगा।
👉 स्टेप 1: पोर्टल पर नागरिक लॉगिन करें

सबसे पहले नीचे दिए गए मुख्य लाल रंग के "ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएँ" बटन पर क्लिक करें। सरकारी पोर्टल खुलने के बाद अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर और ओटीपी से नागरिक लॉगिन (Citizen Login) करें।

👉 स्टेप 2: आधार सीडिंग विकल्प का चयन करें

डैशबोर्ड में प्रवेश करने के बाद आपको बाईं तरफ या मुख्य मेनू में "जमाबंदी आधार सीडिंग" (SMS / Aadhaar Seeding) का विकल्प दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें।

👉 स्टेप 3: जिला, अंचल और मौजा चुनकर जमीन खोजें

अब अपनी जमीन का ज़िला, अंचल, हल्का और मौजा (गाँव) सेलेक्ट करें। इसके बाद अपने खाता नंबर, प्लॉट नंबर या रैयत के नाम से अपनी जमाबंदी खोजकर उसे सेलेक्ट करें।

👉 स्टेप 4: विवरण दर्ज करें और ओटीपी सत्यापित करें

जमीन का रिकॉर्ड नीचे आते ही उसके सामने दिए गए लिंक पर क्लिक करें। अब जमीन मालिक का नाम, उनका आधार नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करें। इसके बाद नीचे दिए गए चेकबॉक्स को टिक करें और 'सेंड ओटीपी' पर क्लिक करें। मोबाइल पर आए 6 अंकों के OTP को भरकर सबमिट करें। आपका आवेदन अंचल कार्यालय को चला जाएगा और कुछ दिनों में यह अप्रूव हो जाएगा।

लाइव जमाबंदी आधार सीडिंग शुरू करने के लिए तैयार हैं?

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

आधार सीडिंग का मुख्य उद्देश्य जमीन धोखाधड़ी और फर्जी रजिस्ट्री को रोकना है। एक बार जमाबंदी आधार से लिंक हो जाने पर, बिना असली मालिक के फिंगरप्रिंट या ओटीपी वेरिफिकेशन के कोई भी उस जमीन को गलत तरीके से नहीं बेच सकता।

नहीं, बिहार भूमि पोर्टल पर जमाबंदी को आधार और मोबाइल नंबर से लिंक करने की पूरी प्रक्रिया सरकार द्वारा निःशुल्क (Free) उपलब्ध कराई गई है।

यदि पुराने रैयत की मृत्यु हो चुकी है, तो सबसे पहले कानूनी वारिसों के नाम पर जमीन का दाखिल-खारिज (Mutation) कराना होगा। नए नाम से जमाबंदी कायम होने के बाद ही वर्तमान मालिकों का आधार लिंक किया जा सकेगा।

आप पोर्टल पर लॉग इन करके अपने जमाबंदी विवरण को दोबारा देख सकते हैं। यदि सीडिंग सफल हो जाती है, तो जमाबंदी के डिजिटल पेज पर मालिक के नाम के आगे आधार नंबर के अंतिम चार अंक और सीडेड (Seeded) का स्टेटस दिखाई देने लगता है।