दाखिल-खारिज (Mutation) रिजेक्ट होने पर क्या करें?
बिहार भूमि म्यूटेशन अस्वीकृत होने के कारण, सुधार की प्रक्रिया और अपील की पूरी जानकारी।
सबसे पहला काम: 'Rejection Order' डाउनलोड करें
जब भी आपका दाखिल-खारिज आवेदन अस्वीकृत (Reject) होता है, तो अंचल अधिकारी (CO) द्वारा एक लिखित आदेश जारी किया जाता है। बिहार भूमि पोर्टल पर जाकर अपनी Mutation Application Status चेक करें और वहां से "View Rejection Order" पर क्लिक करके कारण की कॉपी जरूर डाउनलोड करें। बिना कारण जाने आगे की कार्रवाई न करें।
रिजेक्ट होने के बाद सुधार के 3 कानूनी रास्ते
रास्ता 1: छोटी गलतियों के लिए 'दोबारा नया आवेदन' करें (Re-Apply)
यदि आपका आवेदन किसी सामान्य या लिपिकीय गलती (Clerical Error) के कारण रिजेक्ट हुआ है, तो आपको अदालत के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। आप सीधे त्रुटियों को सुधार कर दोबारा नया आवेदन कर सकते हैं।
- केवाला (Sale Deed) की कॉपी साफ अपलोड न होने पर।
- खता, खेसरा, चौहद्दी या रकबा (Area) टाइप करने में गलती होने पर।
- विक्रेता (Seller) या क्रेता (Buyer) का नाम गलत दर्ज होने पर।
रास्ता 2: भूमि सुधार उप-समाहर्ता (DCLR) के पास अपील दायर करें
यदि अंचल अधिकारी (CO) ने बिना किसी वैध कारण के या गलत तथ्यों के आधार पर आपका म्यूटेशन रिजेक्ट कर दिया है, तो आप उनके फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकते हैं। बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम के तहत आप DCLR कोर्ट में म्यूटेशन अपील (Mutation Appeal) दाखिल कर सकते हैं।
- समय सीमा: रिजेक्शन ऑर्डर जारी होने के 30 दिनों के भीतर आपको DCLR कोर्ट में अपील करनी होगी।
- प्रक्रिया: आप किसी वकील के माध्यम से या खुद भी बिहार भूमि पोर्टल पर 'Online Mutation Appeal' लिंक के जरिए केस फाइल कर सकते हैं।
- DCLR दोनों पक्षों की दलीलें और कागजात देखने के बाद CO के आदेश को रद्द कर म्यूटेशन करने का आदेश दे सकते हैं।
रास्ता 3: पुश्तैनी जमीन के मामले में 'बंटवारा' या 'वंशावली' दुरुस्त करें
अक्सर पुश्तैनी जमीन बेचने या परिवार में हिस्सा तय करते समय म्यूटेशन इस आधार पर रिजेक्ट होता है कि विक्रेता के नाम पर जमाबंदी कायम नहीं है।
पहले सभी हिस्सेदारों के साथ मिलकर पंचायती या रजिस्ट्री जमीन बंटवारा (Partition Deed) करवाएं। इसके बाद अंचल कार्यालय में अपनी वंशावली के आधार पर पहले अपने नाम से नई जमाबंदी कायम करवाएं, उसके बाद ही दाखिल-खारिज की प्रक्रिया आसानी से पूरी होगी।
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कारण 1
विक्रेता (जमीन बेचने वाले) के नाम पर पहले से जमाबंदी (रसीद) चालू न होना।
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कारण 2
डीड (Registry Document) में खाता, खेसरा या रकबा की संख्या का आपस में मिसमैच होना।
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कारण 3
सरकारी, गैर-मजरूआ, खास महाल या भूदान की प्रतिबंधित श्रेणी की जमीन होना।
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कारण 4
जमीन पर मालिकाना हक को लेकर सक्षम न्यायालय (Civil Court) में कोई टाइटल सूट केस लंबित होना।
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कारण 5
हल्का कर्मचारी या राजस्व अधिकारी द्वारा भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के दौरान विवाद पाया जाना।