कैडस्ट्रल सर्वे बनाम रिवीजनल सर्वे खतियान

बिहार में जमीन के इतिहास को समझने के लिए पुराने (Cadastral) और नए (Revisional) सर्वे खतियान की संपूर्ण गाइड।

1. कैडस्ट्रल सर्वे खतियान (पुराना खतियान)

बिहार में सबसे पहला और मुख्य भूमि सर्वे ब्रिटिश काल के दौरान हुआ था, जिसे कैडस्ट्रल सर्वे (Cadastral Survey) कहा जाता है। बिहार के अधिकांश जिलों में यह सर्वे सन 1888 से 1920 के बीच किया गया था। इस सर्वे के आधार पर जो रिकॉर्ड तैयार हुआ, उसे ही आम भाषा में "पुराना खतियान" या "कैडस्ट्रल खतियान" कहा जाता है।

  • यह बिहार में जमीन के मालिकाना हक का सबसे पहला ठोस लिखित दस्तावेज है।
  • अदालतों में जमीन के पुश्तैनी विवाद या दादा-परदादा के नाम पर जमीन साबित करने के लिए इसी खतियान की नकल (Certified Copy) की मांग की जाती है।
Bihar Cadastral and Revisional Survey Map Comparison
चित्र: कैडस्ट्रल सर्वे (पुराना नक्शा) और रिवीजनल सर्वे (नया नक्शा) का तुलनात्मक लेआउट।

2. रिवीजनल सर्वे खतियान (नया खतियान)

समय के साथ जब परिवारों का बंटवारा हुआ और जमीनों की खरीद-बिक्री हुई, तो पुराने कैडस्ट्रल खतियान के रिकॉर्ड्स को अपडेट करने की जरूरत पड़ी। इसके लिए सरकार द्वारा आजादी के बाद सन 1965 से 1970 के दशक में दोबारा सर्वे शुरू किया गया, जिसे रिवीजनल सर्वे (Revisional Survey) कहा जाता है। इसे आम बोलचाल में "नया खतियान" कहा जाता है।

  • यह कैडस्ट्रल सर्वे का ही सुधरा और नया रूप है, जिसमें उस समय के मौजूदा मालिकों के नाम दर्ज किए गए।
  • बिहार के कई जिलों में रिवीजनल सर्वे पूरी तरह से लागू हो गया था, जबकि कुछ क्षेत्रों में तकनीकी या कानूनी विवादों के कारण यह अंतिम रूप से प्रकाशित नहीं हो सका।
दोनों खतियान में मुख्य अंतर (Quick Comparison)
विशेषता (Features) कैडस्ट्रल सर्वे (Cadastral) रिवीजनल सर्वे (Revisional)
प्रचलित नाम पुराना खतियान / मुगली खतियान नया खतियान
सर्वे का समय सन 1888 से 1920 (अंग्रेजों के समय) सन 1965 से 1975 के बीच (आजादी के बाद)
मुख्य उद्देश्य जमीन का पहला नक्शा और मालिकाना हक तय करना। बंटवारे और खरीद-बिक्री के बाद नए मालिकों का नाम जोड़ करना।
कानूनी मान्यता अदालत में पुश्तैनी जमीन के लिए 'आधार' माना जाता है। वर्तमान दखल-कब्जा और हालिया लगान रसीद के लिए महत्वपूर्ण।

ऑनलाइन खतियान कैसे देखें और डाउनलोड करें?

चरण 1: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ - सबसे पहले नीचे दिए गए ऑफिशियल लिंक पर क्लिक करके "बिहार भूमि" पोर्टल के मुख्य होमपेज पर जाएँ।

Bihar Cadastral and Revisional Survey Map Comparison

चरण 2: 'अपना खाता देखें' पर क्लिक करें - होमपेज पर मौजूद "अपना खाता देखें" या "भू-अभिलेख" वाले विकल्प को चुनें।

चरण 3: जिला और अंचल का चयन करें - बिहार का एक डिजिटल नक्शा खुलेगा, उसमें अपने जिला (District) पर क्लिक करें, फिर अपने अंचल (Block) का चयन करें।

चरण 4: मौजा और खतियान का प्रकार चुनें - अपने गाँव/मौजा का नाम सूची से चुनें। यहाँ आपको विकल्प मिलेगा कि आप "कैडस्ट्रल खतियान" देखना चाहते हैं या "रिवीजनल खतियान"। अपनी जरूरत के अनुसार टिक करें।

चरण 5: खाता/खेसरा नंबर से खोजें - अपने जमीन का खाता नंबर, खेसरा (प्लॉट) नंबर या रैयत के नाम में से कोई एक विवरण डालकर "खोजें" बटन पर क्लिक करें। आपका खतियान स्क्रीन पर आ जाएगा, जिसे आप पीडीएफ के रूप में डाउनलोड या प्रिंट कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण आधिकारिक लिंक्स (Official Gov Links)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

कानूनी तौर पर दोनों की अपनी मान्यता है। पुश्तैनी अधिकार और जमीन की वंशावली साबित करने के लिए कैडस्ट्रल (पुराना) खतियान देखा जाता है, जबकि वर्तमान में जमीन पर किसका कब्जा है और हालिया रसीद किस आधार पर कट रही है, इसके लिए रिवीजनल (नया) खतियान मान्य होता है।

बिहार के कुछ अंचलों में रिवीजनल सर्वे का काम पूरा नहीं हो सका था या वह अंतिम रूप से प्रकाशित नहीं हुआ था। ऐसी स्थिति में आपको अपने अंचल कार्यालय (Block) या जिला अभिलेखागार (Record Room) में जाकर मैन्युअल रूप से इसकी खोज करनी होगी।

हाँ, वर्तमान में बिहार सरकार जो 'विशेष सर्वेक्षण' करा रही है, वह पूरी तरह आधुनिक कंप्यूटर टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इसके पूरे होने के बाद कैडस्ट्रल और रिवीजनल दोनों का भ्रम समाप्त हो जाएगा और केवल एक ही फाइनल डिजिटल खतियान मान्य रहेगा।
बिहार विशेष सर्वेक्षण अपडेट

बिहार सरकार अब राज्य में जमीनी विवादों को खत्म करने के लिए आधुनिक GPS आधारित सर्वेक्षण चला रही है, जिससे पुराना और नया खतियान का रिकॉर्ड्स एक जगह सिंक हो जाएगा।

यह पृष्ठ केवल शैक्षणिक और सूचनात्मक मार्गदर्शन के लिए है। अधिकारिक एवं प्रामाणिक नकल के लिए कृपया जिला रिकॉर्ड रूम से संपर्क करें।